आधुनिक जीवनशैली के समाज में जरूरी उपकरणों में मोबाइल कैमरा का अहम स्थान बन चुका है हम जितने तेजी से विकास कर रहे है उतने तेजी से विनाश के पदचिन्हों के तरफ भी लुढ़क रहे है शायद इसलिए ये कहावत कही गई है बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद जब पहली बार मोबाइल फोन पर कैमरा आया तो ये एक विज्ञान का क्रांतिकारी कदम था धीरे धीरे समय के अनुसार कैमरे का महत्व केवल मोबाइल तक ही नहीं बल्कि आधुनिक जीवनशैली में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुका क्योंकि आज कोई भी कार्यक्रम हो सामाजिक या पारिवारिक या अंतर्राष्ट्रीय बिना कैमरे के पूरा नहीं होते है । हर पल को लोग कैद कर के अपनी यादों के लाइब्रेरी में सजा के रखने के आदि हो चुके हैं लेकिन मामला यहां तक तो बहुत अच्छा रहा लेकिन इसी कैमरे ने हमें संवेदनहीन भी करते जा रहा है भीतर ही भीतर
क्यूंकि आज अगर सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाए या कोई अनहोनी हो जाए तो हम मदद के लिए कदम बढ़ाए या न बढ़ाए लेकिन हमारे हाथ खुद ब खुद मोबाइल कैमरे के तरफ बरबस ही बढ़ जाते है क्योंकि हम मदद से ज्यादा कंटेंट बनाने लाइक कमेंट के चाह में भीतर से पूरे तरह से खोखले हो चुके है हम ये समझते है कि चंद लाइक कमेंट हमारे जीवन को बदल देगा मगर हम भूल जाते है कि कैमरे ने हमारी निजता को गिरवी रख लिया है ।
केवल बात दुर्घटना तक सीमित नहीं बल्कि कुछ लोग अपने पत्नी के संग निजी क्रियाओं को भी कैमरे में रिकॉर्ड कर लेते है निजी आनंद के लिए मगर वही गलती से अगर किसी दूसरे डिवाइस तक चला जाए तो उनके मान सम्मान को ठेस पहुंचता है
कुछ इसी कमाने का जरिया भी बना चुके है तो कुछ इसे आनंद के लिए उपकरण बना चुके है लेकिन हमें ये समझना होगा कि कैमरे का ईजाद इसलिए हुआ था कि अच्छे और खुशियों के पल को सदा के लिए संजो लिया जाए और वो समय सदा के लिए अमर हो जाए लेकिन अब कैमरे के सदुपयोग से ज्यादा दुरुपयोग शुरू हो चुका है जो सामाजिक विनाश का संकेत है और ये निजता पर एक तरह से हमला है क्योंकि कैमरे के दौर में शायद ही कुछ निजी बचा हो हर कुछ या कैमरे में या किसी न किसी सोशल वेबसाइट पर है।
कैमरे का इस्तेमाल अच्छे याद पल को संजोने के लिए करे न कि अपनी निजता को भंग कर चंद पैसे लाइक कमेंट के लिए प्रयोग करे
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