मित्रता एक अनमोल रिश्ता है आज अगस्त महीने का पहला रविवार है, यानी फ्रेंडशिप डे। यह दिन स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राओं के बीच काफी लोकप्रिय है।
आज के इस आर्थिक विकास और धनवान होने के दिखावे के दौर में सच्ची मित्रता धुँधली होती जा रही है। बहुत कम ऐसे मित्र मिलते हैं जो अपने काम के साथ-साथ अपने मित्र के सुख-दुःख में भी खड़े हों। हालात तो यहाँ तक हैं कि लोग समय के अभाव या भावना के अभाव में दोस्तों का फोन तक उठाना ज़रूरी नहीं समझते और मित्रता से दूरी बना लेते हैं।
( फ़ोटो साभार गूगल )
लेकिन इन हज़ारों कमियों के बावजूद भी, मित्रता एक ईश्वरीय उपहार है जो हर किसी के नसीब में नहीं होती। यह एक ऐसा रिश्ता है जिसे हम ख़ुद चुनते हैं, बनाते हैं और निभाते हैं। जीवन में हर किसी के पास कम से कम एक ऐसा मित्र होना चाहिए, जो जीवन के उस मज़बूत दीवार की खूँटी की तरह हो, जिस पर मित्र बिना सोचे अपने दुखों का बोझ टाँगकर कुछ देर के लिए भारमुक्त हो सके।
अफ़सोस की बात यह है कि अब यह भावना पूरी तरह से बदल गई है। मित्रता कब धूर्तता में बदल जाए और लालच का भाव कब दोस्ती को लाचार कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। ज़्यादा उम्मीदें और फ़िल्मी दोस्ती, साथ ही आजकल OTT पर आने वाले भद्दे कंटेंट ने मित्रता के भाव को बहुत धूमिल और अश्लील बना दिया है, जिसका फिलहाल कोई इलाज नज़दीक भविष्य में नहीं दिख रहा है।
लेकिन इन सभी उतार-चढ़ाव और कमियों के बावजूद, मित्र और मित्रता दोनों अनमोल हैं। यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें आप ख़ुद अपने मानक तय करते हैं, जिसे दोनों पक्ष ख़ुशी से मानते हैं और यह रिश्ता लंबे समय तक, कभी-कभी तो जीवन भर बना रहता है।
आप सभी दोस्तों, मित्रों और साथियों को मित्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
शुभ अस्तु
3 अगस्त 2025
अशोक कुमार
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